Uttar Pradesh Elections 2022: प्रदेश के अगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र यूपी में सवर्ण वोटर अपनी एक अलग, अहम एवं सत्ता परिवर्तन वाली दमदार पहचान रखता है। सोसल मीडिया पर यूपी के सभी राजनैतीक दलों खास कर भाजपा पार्टी के ऊपर सवर्ण समाज का गुस्सा देखते ही बन रहा है। अलग- अलग तरह से सवर्ण समाज के लोगों द्वारा पार्टियों का बहिष्कार किया जा रहा है, बहिष्कार की मुख्य वजह पार्टियों द्वारा उनके शाशन काल की अवधि के दौरान सवर्ण समाज को अनदेखा करना उनके साथ सौतेला एवं भेदभाव पूर्ण रवैय्या अपनाया जाना ही चुनावों में उनके ऊपर बड़ी मुश्किल बनने जा रहा है। सवर्ण समाज के लोगों द्वारा सोसल मीडया वा ट्विटर पर नोटा ( NOTA ) जमकर ट्रेंड करवाया जा रहा है।
ट्विटर पर विभिन्न प्रकार से जाहिर कर रहे सवर्ण अपना विरोध –
https://twitter.com/Pand80858116Ved/status/1482600646998396929?t=7pwVCe7WobyQJylYPztc_A&s=19
ट्विटर पर वैदिक पांडेय नामक सवर्ण समाज के व्यक्ति द्वारा बड़े ही लुभावने एवं मजाकिया अंदाज में ट्वीट पोस्ट कर अपना विरोध प्रकाशित किया गया, जो देखते ही देखते ट्विटर पर वायरल होने लगा, जिसमें वैदिक पांडेय ने समस्त राजनैतीक पार्टियों खास कर भाजपा पार्टी के लिए समर्पित एक पत्र लिखा हुआ है, जिनका ट्वीट पोस्ट हमने साझा किया हुआ है, आप स्वयं उस ट्वीट को पढ़ सकते है। जिसमें, वैदिक राजनैतीक पार्टियों खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) को लेकर बड़े ही रोचक ढंग से अपनी नाराजगी व्यक्त करते दिखाई दे रहे है, वैदिक पांडेय लिखते है कि- ” जिस प्रकार पिछले 7 वर्षों में प्रदेश के अंदर सवर्णों के साथ अत्याचार एवं भेदभाव किया गया है, उससे आहात होकर एवं दुःखित होकर वह आने वाले चुनावों में भाजपा पार्टी का बहिष्कार करेंगे, एवं समस्त सवर्ण समाज के लोगों को बहिष्कार करने के लिए प्रेरित भी करेंगे, यहाँ पर उन्होंने आगे लिखते हुए अपनी नाराजगी एवं अपने बहिष्कार करने के कारण को भी स्पष्ट रूप में परिभाषित किया हुआ है, वैदिक के अनुसार – पिछले 7 वर्षों में प्रदेश के सवर्णों के साथ मनमाना अत्याचार किया गया, सवर्ण समाज के लोगों पर भाजपा द्वारा मजबूत बनाये गए SC/ST ( हरिजन एक्ट ) का फ़र्ज़ी तरीके से उपयोग कर सवर्णों को प्रताड़ित करने एवं उनके शोषण करने क़ा कार्य किया गया है, लगातार भाजपा द्वारा बढ़ाये जा रहे विभिन्न क्षेत्रों में जातिगत आरक्षण खास कर OBC वर्ग को नीट में विशेष 27% आरक्षण से सवर्ण युवा आत्महत्या करने पर मजबूर हुए हैं, एवं उनकी हिस्सेदारी कम करने का कार्य किया गया है एवं सामान्य वर्ग के छात्र/ छत्राओं को मिलने वाले 20% EWS अरक्षण में मेरिट में छुट दिये जाने की मांग को ना माने जाने को लेकर एवं इन सभी बातों से वे आहत होकर आगामी यूपी चुनावों में पार्टियों की अंधभक्ती त्याग कर, अपने समाज के साथ खड़े रहने का संकल्प भी करते दिखाई दे रहें है। “
आगामी चुनावों में सवर्णों का एक मात्र विकल्प बना नोटा, हो रहा सोसल मीडिया पर जमकर ट्रेंड
सवर्ण समाज का प्रमुखता से नेतृत्व करने वाले, पेशे से इंजिनियर एवं सामाजिक कार्यकर्ता व विश्लेषक़ के तौर पर कार्यरत श्री दुर्गेश पांडेय जी ने सवर्ण टाइम्स से अपने खास वार्तालाप में बताया की सवर्णों के अंदर नोटा के बढ़ते प्रभाव के पीछे उनके साथ होने वाला भेदभाव एवं सौतेला व्यवहार जिम्मेदार हैं, उनके अनुसार पार्टियाँ सवर्णों को केवल वोट बैंक मात्र समझती हैं, चुनाव के समय यही पार्टियां सवर्ण समाज के तलवे पकड़ लेती हैं, फिर एक बार सवर्णों के समर्थन से सरकार बन जाने पर पूरे शाशन काल में सबसे ज्यादा अत्याचार एवं शोषण भी सवर्णों का ही करती हैं एवं नेताओं की नजर में सवर्ण युवा मात्र वोट प्रोडक्ट् हैं, भाजपा द्वारा जिस प्रकार से लगातार अपने शाशन काल में सवर्णों के साथ भेदभावी रवैया स्थापित किया गया हैं उसे सवर्ण समाज आहात हैं, भाजपा द्वारा किये गए SC/ST एक्ट कानून में संशोधन से
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